Monday, March 29, 2010

"जो तू रखे मुझे तह में कर के, तो मैं रखूँ तुझे सौ में कर के"

मम्मी का दृढ़ विश्वास था कि इन्सान को हमेशा चुस्त, तारो-ताज़ा और तैयार रहना चाहिए. इसीलिए जो उन्हें जानते हैं उन्हें मालूम है कि वह हमेशा तैयार हो कर, अच्छे-धुले कपड़े पहन कर रहती थी. सुबह-सवेरे वह जल्दी उठ कर तैयार हो कर पूजा करने जाती थी. उस समय, कभी अगर मैं बिना नहाये, सिर खुजाता बैठा होता तो उन्हें बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता था. वह कहतीं कि क्या "खबदोड़ा" से बैठे हो. भगवान ही जानता है कि खबदोड़ा क्या होता है, पर मेरे जेहेन जो उसका विजुअल है वह एक बहुत ही बिखरे बालों वाला, आलसी सा, बदबूदार जानवरनुमा इंसान है जो मुचड़े हुए गंदे कपडे पहने रहता है. मुचड़े हुए गंदे कपडे, क्योंकि जब मैं नहा-धो कर अच्छे कपड़े पहन कर आता था तो फिर खबदोड़ा सा नहीं कहलाता था.

मम्मी को धुले और तह किये हुए कपड़े ढंग से अलमारी में रखने का शौक था. मुझे आज भी याद है कि मैं कभी उनकी धोती या साड़ी के सिरे को पकड़ कर उन्हें उसको तह करने में मदद करता था, तो वह पूछतीं थी पता है यह साड़ी क्या कह रही है? मैं पूछता कि क्या कह रही है तो कहती यह कह रही है कि "जो तू रखे मुझे तह में कर के, तो मैं रखूँ तुझे सौ में कर के"

मैं पूछता, "इसका क्या मतलब माँ?" तो वह कहतीं, "कपड़ा कहता है कि अगर तुम मुझे ढंग से तह कर के रखो तो मैं तुम्हें सौ लोगों में एक बना के रखूंगा."

मैं कुछ सोच कर पूछता कि "कपड़ा कैसे तुम्हें सौ लोगों में एक बना के रखेगा?" तो वह कहती "क्योंकि निन्यानवे लोग खबदोड़ा से रहते हैं, नाक निकल रही है, सुड-सुड कर रहे हैं, ठोड़ी खुजा रहे हैं, कान खुजा रहे हैं. वहाँ अगर तुम अच्छे बच्चे बन कर तैयार हो कर आओगे तो सौ में एक लगोगे कि नहीं?"

हाँ यह बात तो ठीक है. मेरी समझ में आ जाता. मैं भी अपने कपडे तह करके अलमारी में सजाता. मल-मल कर नहाता ताकि खबदोड़ा सा न लगूँ.

आज भी मेरी बेटी हंसती है, कहती है कि पापा तो कपड़ों को प्रेस करते-करते उनसे बातें करते हैं. क्या करूँ मुझे अच्छे धुले तह किये हुए कपड़े में माँ का चेहरा नज़र आता है, और लगता है कि कपड़ा मुझसे कह रहा है, "जो तू रखे मुझे तह में कर के, तो मैं रखूँ तुझे सौ में कर के."

2 comments:

Kamaksha Mathur said...

एक और सुन्दर सी रचना!!! बहुत बढ़िया!!!

Anjini said...

"कपड़े की इज्ज़त करो तो, कपड़ा भी तुम्हारी इज्ज़त रखता है ". कितनी अच्छी बात सिखाई हमारी माताओं ने कि आज तक हमारे जेहेन में इन बातों का असर है.